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Bolegi Na Bulbul Ab (Hindi Edition of I Shall Not Hear The Nightingale)
Khushwant Singh
Author Khushwant Singh
Publisher Rajpal And Sons
ISBN 9789350642337
No. Of Pages 225
Edition 2014
Format Paperback
Language Hindi
Price रु 265.00
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Description

Bolegi Na Bulbul Ab (Hindi Edition of I Shall Not Hear The Nightingale) by Khushwant Singh

बोलेगी न बुलबुल


बोलेगी न बुलबुल अब खुशवंत सिंह के उपन्यास ‘आई शैल नॉट हियर द नाइटिंगल’ का अनुवाद है। समय है 1942-43 जब भारतीय क्रांतिकारियों का ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन अपनी चरम सीमा पर था। अंग्रेज़ों के प्रति वफ़ादार, फर्स्ट क्लास मजिस्ट्रेट सरदार बूटा सिंह अपने परिवार के साथ अमृतसर में रहते हैं और खबर है कि जल्द ही सम्मान-सूची में उनका नाम आने वाला है। लेकिन बूटा सिंह इस बात से बिलकुल बेखबर हैं कि उनका बेटा क्रांतिकारियों के एक गिरोह का नेता बन गया है और अंग्रेज़ों के खिलाफ बगावत करने में लगा है। बूटा सिंह को जब यह बात पता चलती है तो वह अपने बेटे को बेदखल कर देते हैं। भगवान में आस्था रखनेवाली बूटासिंह की पत्नी सभराई अपने वाहे गुरु से इस मुश्किल घड़ी का सामना करने के लिए अरदास करती है। एक तरफ बेटे की ज़िन्दगी जीवन और मृत्यु के बीच झूल रही है तो दूसरी तरफ उसके पति की इज़्ज़त का सवाल है। कैसे होगा इस कठिन घड़ी में बचने का उपाय...

जाने-माने लेखक और पत्रकार खुशवंत सिंह का यह उपन्यास भावनाओं की इस उधेड़बुन को बखूबी दर्शाता है।

1915 में हडाली गांव में खुशवत सिंह का जन्म हुआ, जो अब पाकिस्तान में है। अपनी स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद, लंदन जा कर उन्होंने वकालत पढ़ी। कुछ समय तक वे वकील बने रहे, लेकिन वकालत में उनका मन नहीं लगा। लिखने-पढ्ने में उनकी रुचि थी, और जब उन्हें भारत सरकार की पत्रिका ‘योजना’ के संपादक के पद का अवसर प्राप्त हुआ, तो उन्होंने उसे तुरन्त स्वीकार कर लिया। उसके बाद वे नेशनल हेरल्ड और द हिन्दुस्तान टाइम्स के संपादक रहे। जब उन्होंने द इलस्ट्रेटेड वीकली ऑफ इंडिया के संपादन की बागडोर संभाली तो यह भारत की सबसे लोकप्रिय पत्रिका बन गई। इस के बाद खुशवंत सिह एक स्वतंत्र पत्रकार के रूप में लिखते रहे और उनका साप्ताहिक स्तंभ विद मैलिस टूवर्ड्स वन एण्ड ऑल देश के दर्जन से अधिक अखबारों और पत्रिकाओं में छपता है और उनके पाठकोँ को बहुत बेसब्री से इसका इंतज़ार रहता है।

ट्रेन टू पाकिस्तान, औरतें, समुद्र की लहरों में और सनसेट क्लब उनके अन्य प्रसिद्ध उपन्यास है जो हिन्दी में भी प्रकाशित हो चुके हैं।

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