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Sairandhri (Novel)
Narendra Kohli
Author Narendra Kohli
Publisher Vani Prakashan
ISBN 9788181439741
No. Of Pages 130
Edition 2014
Format Paperback
Language Hindi
Price रु 95.00
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Description

Sairandhri (Novel) By Narendra Kohli

सैरंध्री


पाण्डवों का अज्ञातवास महाभारत कथा का एक अत्यन्त महत्वपूर्ण और मार्मिक स्थल है। कहा जाये कि यह एक वर्ष ही उनकी असली परीक्षा का काल है, जब उन्हें अपना नैसर्गिक रूप त्याग कर अलग और हीनतर रूप धारण करने पड़ते हैं। सवाल उठता है दुर्योधन की गिद्ध-दृष्टि से पाण्डव कैसे बचे रह सकें ? अपने अज्ञातवास के लिए पाण्डवों ने विराट नगर को ही क्यों चुना ? पाण्डवों के शत्रुओं में प्रछन्न मित्र कहाँ थे ? और मित्रों में प्रछन्न शत्रु कहाँ पनप रहे थे ? बदली हुई भूमिकाओं से तालमेल बैठाना पाण्डवों के लिए कितना सुकर या दुष्कर था ? अनेक प्रश्न हैं जो इस प्रसंग में उठते हैं।

लेकिन पाण्डवों से भी ज्यादा मार्मिक है द्रौपदी का रूपान्तरण। पाण्डवों को तो किसी-न-किसी रूप में भेष बदलने का वरदान मिला हुआ था या उनमें यह गुण स्वाभाविक रूप से मौजूद था। अर्जुन को अगर उर्वशी का श्राप था तो युधिष्ठिर को द्यूत प्रिय होने के नाते कंक बनने में सुविधा थी, भीम वैसे ही भोजन भट्ट और मल्ल विद्या में पारंगत थे। समस्या तो द्रौपदी की थी जो न केवल सुन्दरी होने के नाते सबके आकर्षण का केन्द्र थी बल्कि जिसने कभी सेवा-टहल का काम नहीं किया था। सुदेष्णा जैसी रानियाँ तो उसकी सेवा-टहल करने के योग्य थी। ऐसी स्थिति में उस एक वर्ष को सैरंध्री बनकर काटना द्रौपदी के लिए कैसी अग्नि परीक्षा रही होगी, इसकी कल्पना ही की जा सकती है।

मँजे हुए उपन्यासकार नरेन्द्र कोहली ने इस उपन्यास में इसी प्रश्न को अंकित किया है। इसके साथ-साथ नरेन्द्र कोहली ने और भी अनेक प्रश्नों को छुआ है, मिसाल के लिए द्रौपदी के सौन्दर्य को लेकर सुदेष्णा का भय और विराट की आशंका या फिर वृहन्नला और द्रौपदी की अपनी-अपनी व्यथाएँ। इन सबको नरेन्द्र कोहली ने अपनी सुपरिचित शैली में बड़ी सफलता से चित्रित किया है।

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